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यह ब्लॉग आपके मन और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लिखा गया है | _ जहां आप पायेगे स्वास्थ्य से जुड़े टिप्स,और हर दिन प्रेरणा पाने और खुश रहने के आसन तरीके
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हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ….
कभी डाँटती है हमें, तो कभी गले लगा लेती है माँ…..
हमारी आँखोँ के आंसू, अपनी आँखोँ मेँ समा लेती है माँ…..
अपने होठोँ की हँसी, हम पर लुटा देती है माँ……
हमारी खुशियोँ मेँ शामिल होकर, अपने गम भुला देती है माँ….
जब भी कभी ठोकर लगे, तो हमें तुरंत याद आती है माँ…
दुनिया की तपिश में, हमें आँचल की शीतल छाया देती है माँ…..
खुद चाहे कितनी थकी हो, हमें देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ….
प्यार भरे हाथोँ से, हमेशा हमारी थकान मिटाती है माँ…..
बात जब भी हो लजीज खाने की, तो हमें याद आती है माँ……
रिश्तों को खूबसूरती से निभाना सिखाती है माँ…….
लब्जोँ मेँ जिसे बयाँ नहीँ किया जा सके ऐसी होती है माँ…….
भगवान भी जिसकी ममता के आगे झुक जाते हैँ
– हा वो मां ही होती है🙏🏻🙏🏻 मां जैसा कोई नहीं 😊😊
ताड़ासन (tadasan)
रोजाना ताड़ासन (tadasan) करने से आपकी इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है. साथ ही इससे आपकी शरीर लचीली और रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है. इससे आपको सकारत्मकता महसूस होती है.
पहला प्रकार है नाड़ी शोधन प्राणायाम। इसी नाड़ी से अभिप्राय मार्ग या फिर शक्ति की धारा से है जबकि शोधन यानी शुद्धिकरण करना। नाड़ी शोधन में नाड़ियों की शुद्धिकरण की प्रक्रिया होती है। इस प्राणायाम को करना बहुत सरल है और इसके फायदे बहुत होते हैं।
कैसे करें –
नाड़ी खोज प्राणायाम के फायदे – इस प्राणायाम को करने से मन शांत होता है साथ ही एकाग्रता में वृद्धि होती है। इसे करने से तनाव, चिंता, नींद ना जाने की समस्या, सर दर्द आदि दूर हो जाता है। ह्रदय और फेफड़ो को यह प्राणायाम शक्ति प्रदान करता है जिससे शरीर स्वस्थ्य रहता है।
ध्यान देने योग्य नियत - जब भी इस प्राणायाम को करें तो इस बात का ध्यान रखें कि आपकी आंखों को बिल्कुल सीधा होना चाहिए। इस प्राणायाम को सूर्योदय के समय अच्छा करना होता है। जब भी इस प्राणायाम को करे तो खाली पेट करे। यदि आपको कोई बीमारी है तो आपको इसका अभ्यास किसी प्रशिक्षित प्रशिक्षक की निगरानी में करना चाहिए।
यह "प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)" का पहला प्राणायाम था।
प्राणायाम के प्रकार” में दूसरा प्रकार है शीतली प्राणायाम। इसमें शीतली शब्द को पढ़कर पता चल रहा है कि शीतलता से है और शीतली प्राणायाम का अर्थ है शीतलता प्रदान करने वाला प्राणायाम। इस प्राणायाम को करने से शरीर में शीतलता दिखती है। यह प्राणायाम शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। इस प्राणायाम को गर्मी के दिनों में करने से अत्यधिक लाभ मिलता है।
कैसे करें –
शीतली प्राणायाम के फायदे – यह प्राणायाम शरीर को शीतलता प्रदान करता है। इसी के साथ दिमाग व् शरीर दोनों शांत रहें। यह भूख को भी नियंत्रित करता है। इससे भूख का अनुभव कम होता है। प्राणायाम के करने से मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं।
ध्यान देने योग्य सावधानी – इस प्राणायाम को ठण्ड के मौसम में बहुत कम या फिर ना करें। जिन्हे दिल से जुड़ी बीमारी उन्हें भी इस प्राणायाम को नहीं होना चाहिए।
यह था "प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)" का दूसरा प्राणायाम।
"प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)" के प्रकार में तीसरा प्राणायाम है उज्जायी प्राणायाम। उज्जायी प्राणायाम में उज्जायी का अर्थ विजय प्राप्त करने से है और उज्जायी प्राणायाम का अर्थ होता है बंधन से स्वतन्त्रा संभवना।
कैसे करें –
उज्जायी प्राणायाम के लाभ – यह प्राणायाम शांति प्रदान करता है। इसे करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह माइग्रेन में सत्यापन होता है। प्रस्तुतिकरण के लिए बहुत ही दृश्य होता है।
ध्यान देने योग्य सूची - उज्जायी प्राणायाम को खाली पेट सुबह या फिर सप्ताह के समय करें। सांस संबंधी कोई समस्या है जो प्रशिक्षक की निगरानी में इसका अभ्यास करना चाहिए।
यह था “प्राणायाम के प्रकार” का तीसरा प्राणायाम।
प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)” का चौथा प्रकार है कपालभाती प्राणायाम। कपालभाति को हठयोग भी कहा जाता है। कपालभाति में कपाल का मतलब माथा है और भाती यानी तेज, प्रकाश। इसका अभ्यास करने से विवरण पर विवरण होता है। यह बहुत ऊर्जावान प्राणायाम होता है।
कैसे करें –
कपालभाती प्राणायाम के फायदे – यह प्राणायाम शरीर की सभी नाड़ियों की शुद्धिकरण का कार्य करता है। साथ ही मेटाबॉलिज्म को भी सुचारु रूप से संचालित करने में मदद करता है। वजन को कम करता है। रक्त परिसंचार को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। इसका नियमित अभ्यास से चेहरे पर निखार आता है।
ध्यान देने योग्य सावधानी – इस आसन को प्रशिक्षक की निगरानी में अच्छा करना होगा। तभी आप इसे सही तरीके से कर सकते हैं। इस प्राणायाम को करते समय यदि चक्कर जैसा महसूस होता है तो प्राणायाम को कुछ समय के लिए रोक दे।
यह था “प्राणायाम के प्रकार” का चौथा प्राणायाम।
"प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)" का पांचवा प्रकार है दीर्घ प्राणायाम। दीर्घ का अर्थ होता है क्रेन। दीर्घ प्राणायाम यानी की दीर्घ आयु प्रदान करना। इस प्राणायाम को दीर्घायु बनाने वाला प्राणायाम कहा जाता है।
कैसे करें –
दीर्घ प्राणायाम के फायदे – इस प्राणायाम को करने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है। यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली में भी सुधार करने में सहायक है। यह शरीर में एलर्जी का कारण बनता है।
ध्यान देने योग्य बात - यदि आपको सांस से संबंधित कोई बीमारी है तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें इस प्राणायाम को प्रशिक्षक की निगरानी में रखें। प्राणायाम को करते समय चक्कर या बेचैनी हो तो प्राणायाम को रोक दे।
यह था “प्राणायाम के प्रकार” का पांचवा प्राणायाम।
"प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)" का छठा प्रकार है भस्त्रिका प्राणायाम। भस्त्रिका यानी धौंकनी। जिस तरह से एक लोडहार वायु के वेग से ऊष्मागतिकरण शुद्धिकरण करता है ठीक उसी तरह यह प्राणायाम शरीर की वास्तविकता को दूर कर उसका शुद्धिकरण करता है। प्राणायाम में भस्त्रिका प्राणायाम का अपना महत्व है।
कैसे करें –
भस्त्रिका प्राणायाम के फायदे – यह प्राणायाम रक्त संचार को सुधारता है। ही शरीर में उपस्थिति पदार्थों को दूर करता है। इस प्राणायाम को करने से दमा, मोटापा जैसी बीमारियां हो जाती हैं।
ध्यान देने योग्य - इस प्राणायाम को हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को नहीं देना चाहिए। इस प्राणायाम को यदि गर्मी के दिनों में कर रहे हैं तो प्राणायाम के बाद शीतली प्राणायाम को जरूर करें। क्योंकि भस्त्रिका प्राणायाम को करने से शरीर में अत्यधिक गर्मी होती है। इस कारण शीतलता प्राणायाम करने से शरीर का तापमान नियंत्रित हो जाएगा।
यह था “प्राणायाम के प्रकार” का छठा प्राणायाम।
"प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)" के प्रकार में सातवां प्राणायाम है बाहरी प्राणायाम। बाहरी प्राणायाम में बाहरी से ढाँचा बाहर से होता है और जिस प्राणायाम में साँस को बाहर की तरफ रखता है उसे बाहरी प्राणायाम कहा जाता है। इस प्राणायाम को भी आसानी से किया जा सकता है।
कैसे करें –
बाहरी प्राणायाम के फायदे – यह प्राणायाम मधुमेह के लिए बहुत ही लाभदायक है। यह एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही शिकायत से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।
ध्यान देने योग्य - हाई ब्लड प्रेशर से जुड़े इस प्राणायाम को नहीं होना चाहिए। जो महिलाएं गर्भवती हैं उन्हें भी अपने डॉक्टर की सलाह पर यह प्राणायाम करना चाहिए। प्राणायाम को करते समय पेट में दर्द हो तो इसे ना करें।
यह था “प्राणायाम के प्रकार” का सातवां प्राणायाम।
"प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)" का आठवां प्राणायाम है भ्रमरी प्राणायाम। भ्रमरी प्राणायाम में भ्रमरी का अर्थ बर्नारा या फिर चमचमाता है। भ्रमरी प्राणायाम करते समय मधुमक्खियाँ की भाँति होती है। यह प्राणायाम भी बहुत दृश्य होता है।
कैसे करें –
भ्रमरी प्राणायाम के फायदे – इस प्राणायाम को करने से तनाव से मुक्ति मिलती है। मन को लग रहा है। इसी विश्वास का विकास होता है।
ध्यान देने योग्य सावधानी – इस प्राणायाम को खाली पेट करना चाहिए साथ ही इसे सभी प्राणायाम को करने के बाद ही करना चाहिए। इससे अच्छे लाभ प्राप्त होते हैं।
यह "प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)" का आठवाँ प्राणायाम था।
सुलभ लेख में आपको जाना प्राणायाम क्या होता है और “प्राणायाम के प्रकार (प्राणायाम के प्रकार)” के बारे में विस्तृत जानकारी। आशा है कि आपके लिए यह लेख ज्ञानवर्धक होगा।
जीवन में सब से जरूरी अगर कोई चीज हे तो वो हे हमारा स्वस्थ शरीर और मन अगर हमारा शरीर एक दम फिट रहता है तो हम बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना कर लेते है ।ओर शरीर और मन को स्वस्थ रखने का सब से आसान और सरल तरीका का है।(योग) योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाए योग के बहुत सारे फायदे हे। योग शुगर, कब्ज जैसी शिकायतों में भी मदद करता है। योग और ध्यान मन की शांति और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना जाता है। अक्सर लोग सोच-विचार करते हैं कि योग केवल शरीर को लचीला बनाने के लिए ही किया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। योग के ढेरों आसन हैं, जिनके कई फायदे हैं। योग की सहायता से आप जीवन भर जवां और स्वस्थ बने रह सकते हैं। अकसर लोग योग को एक धीमा माध्यम मान लेते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। योग आपको हेल्दी रहने में कई तरह से मदद कर सकता है। जानिए क्या हैं योग के फायदे:
1. मन रहेगा शांत: योग से मांसपेशियों का अच्छा व्यायाम होता है, लेकिन चिकित्सा शोधों ने ये साबित कर दिया है कि योग शरीर और मानसिक रूप से वरदान है। योग से तनाव दूर होता है और अच्छी नींद आती है, भूख अच्छी लगती है, इसलिए पाचन भी सही नहीं रहता ह
2. तन और मन का व्याम: यदि आप जिम जाते हैं, तो यह आपके शरीर को तो तंदुरुस्त करता हैं, लेकिन मन का क्या। वहीं अगर आप योग का सहयोग लेते हैं, तो यह आपके तन के साथ ही साथ मन और मश्तिष्क को भी तंदुरुस्त करेगा।
3. दूर भागेंगे रोग: योगाभ्यास से आप प्रतिबद्धता से भी मुक्ति पा सकते हैं। योग से इम्यूनिटी बढ़ती जाती है। योग से शरीर स्वस्थ और निरोग बनता है।
4. वजन नियंत्रण: योग मांस पेशियों को पुष्ट करता है और शरीर को तंदुरुस्त बनाता है, वहीं दूसरी ओर योग से शरीर के वजन को भी कम किया जा सकता
5. ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करें: योग से आप अपने ब्लड शुगर लेवल को भी कंट्रोल करता है
योग से आप हर बीमारी का इलाज कर सकते योग से आप बीमारी से ही दूर रह सकते हे अपने दैनिक जीवन में हमे रोज कम से कम 30 मिनट अपने शरीर को देने चाहिए ।
माँ — एक शब्द नहीं, पूरी दुनिया माँ… ये सिर्फ एक शब्द नहीं है, ये एक एहसास है, एक छाया है, एक ऐसी दुनिया है जहाँ इंसान बिना किसी डर के, बिन...